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Showing posts from January, 2022

सैयद साहब की बीवी को ज़कात देना कैसा है ? जबकि बीवी सैयद नहीं❓

  محمــــد امتيــــــــاز قمــــر رضـــوى امجــدى सवाल* सैयद साहब की बीवी को ज़कात देना कैसा है ? जबकि बीवी का सैयद नहीं है ब हवाला जवाब इनायत करें❓* *साईलا*🌹कनीज़ ए मुस्तफा* *जवाब،،सैयद साहब की बीवी जो सैयद नहीं है अगर वह मालिके निसाब से खाली हैं तो ज़कात ले सकती हैं और उसे दे सकते हैं यहां तक कि किसी की बीवी सैयद है पर शौहर सैयद नहीं और उनसे जो औलादें हों अगर वह फक़ीर हो तो वह भी ज़कात ले सकता है* *खुसूसन सैयदों की शान इस्लाम में बहुत आला है कि ग़नी आमिल ज़कात से उजरत ले सकता है मगर यह हज़रात तो क्या उनका ज़र्रा खरीद गुलाम यह उजरत भी नहीं ले सकता, इससे वह लोग इबरत पकड़े जो आज कल सैयदों को ज़कात खाना जायज़ करने की धुन में है सादात को ज़कात लेना हरगिरज़ जायज़ नहीं*  (مراۃالمناجیح جلد سوم حدیث 57) *अलबत्ता जब वह सैयद नहीं तो ज़कात ले सकती हैं जबकि हाज़त मंद हो यानी मालिके निसाब ना हो क्योंकि ममानअत फक़त सादात ए किराम के हक़ में है* *यहां तक कि अगर कोई औरत सैयद है और शौहर सैयद नहीं तो उन से जो औलाद पैदा हो अगर वह फक़ीर हो तो उसको भी देने में हर्ज नहीं क्योंकि नसब बाप से चलता है...

मां बीवी और दो बेटे में तरका की तक़्सीम कैसे❓

 मां बीवी और दो बेटे में तरका की तक़्सीम कैसे❓   * فقيــــر محمــــد امتيــــــــاز قمــــر رضـــوى امجــدى *सवाल،، ज़ैद का इंतक़ाल हो गया उसने अपने पीछे मां बीवी और दो बेटे को छोड़े तरका की तक़्सीम कैसे होगी❓* *साईल ،،मोहम्मद एजाज़ अलम (दरभंगा)* *जवाब* ،، *उन के तजहिज़ व तकफीन का खर्च पूरा करने के बाद अगर उन पर कर्ज़ हो तो उस की अदायगी की जाए, और गैरे वारिस के लिए अगर ज़ैद ने वसीयत की हो तिहाई माल से उस से नफीज़ करने के बाद मरहूम का मुकम्मल तरका अडतालीस (४८) हिस्सों में तक़्सीम होगा,* *📿 जिस में से बेवा को आठवां हिस्सा यानी (६) हिस्से मिलेंगे और छट्टा (६) हिस्सा यानी आठ (८) हिस्से वालिदा को मिलेंगे और बक़िया चौंतिस (३४) हिस्से मरहूम के दोनों बेटों में तक़्सीम होंगे, और वह इस तरह के हर एक बेटे को सतरह सतरह (१७/१७) हिस्सा मिलेंगे,* *✨ मसलन ،، वरसा में 48000 तक़्सीम करने के हैं, तो बेवा को 6000, वालिदा को 8000, और दोनों बेटों में से हर एक को 17000 / 17000 मिलेंगे* *🌷والله و رسولہ اعلم باالصواب🌷* *✍🏻 अज़ क़लम 🌹हज़रत अल्लामा व मौलाना मोहम्मद इम्तियाज़ क़मर रज़वी अमजदी साहब कि...

क्या औरत साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ सकती है ? नेज़ मर्द तहबंद पहन कर नमाज़ पढ़ सकता है कि नहीं❓

    * فقيــــر محمــــد امتيــــــــاز قمــــر رضـــوى امجــدى * *सवाल،، क्या फरमाते हैं उलमा ए दीन औरतें अक्सर वो बेश्तर साड़ी पहनती है तो क्या साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ सकती है जबकि नीचे का हिस्सा खुला रहे, मर्द हज़रात भी सिर्फ तहबंद पहन कर नमाज़ पढ़ते हैं क्या यह जायज़ है❓* *साईल،،मसउद रज़ा* *जवाब،، औरतों को साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ना तब मना है जबकि बे पर्दगी और जिस्म का हिस्सा नज़र आए वरना पर्दे के साथ साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ने में कोई क़बाहत नहीं,* *और जिन इलाक़ों में साड़ी पहनना खास गैर मुस्लिम औरतों का शआर हो की साड़ी पहनी हुई औरत को देख कर फौरन गुमान हो की यह गैर मुस्लिम है उन इलाक़ों में मुसलमान औरत को साड़ी पहनना जायज़ नहीं है की यह कुफ्फार से तशुब्ह है,* *और जिन इलाक़ों में साड़ी खास गैर मुस्लिम औरतों का शआर ना हो बल्कि मुस्लिम औरतें भी पहनती हो और गैर मुस्लिम औरतें भी तो उन इलाकों में जायज़ व दुरुस्त है, अगरचे नीचे का हिस्सा खुला हो मर्द हज़रात भी लुंगी पहन कर नमाज़ पढ़ सकते हैं पढ़ा सकते हैं हर्ज नहीं जायज़ है* *फिक़्ह ए मिल्लत हज़रत अल्लामा मुफ्ती जलालुद्दीन अहमद अमजदी...