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बाप माँ बीवी और दो बेटों में विरासत कैसे तक़्सीम करें ❓

 बाप माँ बीवी और दो बेटों में विरासत कैसे तक़्सीम करें ❓ *🌹 सवाल* 👉🏻 *📿 क्या फरमाते हैं उलमा ए दीन व मुफ्तियाने शरअ मतीन इस मसअला में की बाप, माँ, बीवी और दो बेटों में विरासत कैसे तक़्सीम होगी इन में से हर एक को कितना कितना मिलेगा❓* *💦 साईल* ➡️ *🌹 नूर आलम* *🌹 जवाब* 👉🏻 *📿 बर तक़दीरे सिदक़ साईल व इंहिसारे वरसा दर मज़कूरें मैयत की तजहिज़ व तकफीन दफन के अखरजात, क़र्ज़ की अदाएगी और वसीयत अगर हो तो एक तिहाई (1/3) से पूरी करने के बाद, कुल मिरास को अडतालीस (48) हिस्सों में तक़्सीम किया जाएगा, बाप को सदस्य यानी छठ्ठा हिस्सा (6/1) यानी आठ (8) हिस्सा, वालिदा को भी सदस यानी छठ्ठा हिस्सा (6/1) यानी आठ हिस्सा मिलेगा* *✨ चूंकी इरशादे बारी ए तआला है ⤵️* *📖 وَلِاَبَوَيْهِ لِکُلِّ وَاحِدٍ مِّنْهُمَا السُّدُسُ مِمَّا تَرَکَ اِنْ کَانَ لَهُ وَلَدٌ.* *👉🏻 और मैयत के मां-बाप को हर एक को उसके तरका से छठ्ठा अगर मैयत के औलाद हो,* 📚 (तर्जुमा कंज़ुल ईमान सूरतुन निसा) *👉🏻 लिहाज़ा बेवा को कुल माल का आठवां (1/8) हिस्सा मिलेगा* *💫 मां बाप और बेवा के मुक़र्ररा फर्ज़ हिस्से देने के बाद बाक़ी 26 हिस...

बाप दादा और बेटी में विरासत की तक़सीम❓*

 बाप दादा और बेटी में विरासत की तक़सीम❓* *🌹 सवाल* 👉🏻 *📿 क्या फरमाते हैं उलमा ए किराम व मुफ्तियाने एज़ाम इस मसअला में मरहूम के मैरास में बाप दादा,बेटी में विरासत कैसे तक़सीम होगी❓* *💦 साईल* ➡️ *अहसान रज़ा* *🌹 जवाब* 👉🏻 *📿 बर तक़दीरे सिदक़ साईल व इंहिसारे वरसाए दर मज़कूरें मैयत की तजहीज़ व तकफीन के अखराजात,क़र्ज़ की अदायगी और अगर वसीयत की हो तो एक तिहाई (1/3) से पुरी करने के बाद मरहूम का मुकम्मल तरका छै (6) हिस्सों में तक़सीम होगा जिस में से बाप को छट्टा हिस्से बतौरे अस्बा 1+2=3, और बेटी को निस्फ हिस्सा यानी तीन हिस्से मिलेंगे* *✨ इरशादे बारीए तआला है ⤵️* *📖 وَلِاَبَوَيْهِ لِکُلِّ وَاحِدٍ مِّنْهُمَا السُّدُسُ مِمَّا تَرَکَ اِنْ کَانَ لَهُ وَلَدٌ.* *👉🏻 और मैयत के माँ बाप को हर एक को उस के तरका से छट्टा अगर मैयत के औलाद हों,* 📖 (ترجمہ کنزالایمان سورۃ النساء،) *⚖️ और बेटी को निस्फ हिस्सा, यानी कुल आधा हिस्सा मिलेगा,* *✨ जैसा की इरशादे बारीए तआला है ⤵️*  *📖 وَ اِنْ كَانَتْ وَاحِدَةً فَلَهَا النِّصْفُؕ* *👉🏻 और अगर एक लड़की हो तो उस का आधा,* 📚 (ترجمہ کنزالایمان سورۃ ال...

सरकारी जॉब करने के लिए पैसा लगाना कैसा है❓

  सवाल،،क्या फरमाते हैं उलमा ए दीन मुफ्तियान ए शरअ मतीन इस मसअला के बारे में की ज़ैद सरकारी जॉब करना चाहता है और ज़ैद का कहना है कि वहां बगैर पैसा दिए जाब नहीं लग सकती और सरकारी जॉब के लिए बगैर पैसा दिए लगना मुमकिन भी नहीं है तो क्या ज़ैद पैसा देकर जॉब लगा सकता है कुरआन व हदीस की रौशनी में जवाब इनायत फरमाएं❓* *सliल،،मोहम्मद ताज रज़ा* *जवाब،، मज़कूरा शख्स यानी ज़ैद अगर सरकारी जॉब के क़ाबिल है और बगैर पैसा दिए जाॅब नहीं मिल सकता है, और हर क़ाबिल शख्स से इतने रुपए लिए जाते हैं, यानी यह रक़म हुकूमत के क़वानीन के मुताबिक़ हो तो, यह रिशवत नहीं,* *हां अगर अलग से कोई पैसा मांगता हो की यह जॉब पाने के लिए इतना रक़म लगेगा तो यह ज़रूर रिशवत है, और रिशवत लेना देना जायज़ नहीं,* *✨ हुज़ूर आला हज़रत रज़ि अल्लाहू तआला अन्हू फरमाते हैं कि, हदीस में फरमाया ⤵️* *📖 الراشی والمرتشی کلا ھما فیالنار* 📚 (کنز العمال  الفصل الثالث فی الہدیۃوالرشوۃ  مبطوعہ مؤ سسۃ الرسالۃ بیروت ٦/١١٣) *रिशवत लेने वाला और रिशवत देने वाला दोनों दोज़खी हैं* 📚 (बहवाला फतावा रज़विया जिल्द ६ सफा ५५१/रज़ा फाउंडेशन लाहौर)...

सैयद साहब की बीवी को ज़कात देना कैसा है ? जबकि बीवी सैयद नहीं❓

  محمــــد امتيــــــــاز قمــــر رضـــوى امجــدى सवाल* सैयद साहब की बीवी को ज़कात देना कैसा है ? जबकि बीवी का सैयद नहीं है ब हवाला जवाब इनायत करें❓* *साईलا*🌹कनीज़ ए मुस्तफा* *जवाब،،सैयद साहब की बीवी जो सैयद नहीं है अगर वह मालिके निसाब से खाली हैं तो ज़कात ले सकती हैं और उसे दे सकते हैं यहां तक कि किसी की बीवी सैयद है पर शौहर सैयद नहीं और उनसे जो औलादें हों अगर वह फक़ीर हो तो वह भी ज़कात ले सकता है* *खुसूसन सैयदों की शान इस्लाम में बहुत आला है कि ग़नी आमिल ज़कात से उजरत ले सकता है मगर यह हज़रात तो क्या उनका ज़र्रा खरीद गुलाम यह उजरत भी नहीं ले सकता, इससे वह लोग इबरत पकड़े जो आज कल सैयदों को ज़कात खाना जायज़ करने की धुन में है सादात को ज़कात लेना हरगिरज़ जायज़ नहीं*  (مراۃالمناجیح جلد سوم حدیث 57) *अलबत्ता जब वह सैयद नहीं तो ज़कात ले सकती हैं जबकि हाज़त मंद हो यानी मालिके निसाब ना हो क्योंकि ममानअत फक़त सादात ए किराम के हक़ में है* *यहां तक कि अगर कोई औरत सैयद है और शौहर सैयद नहीं तो उन से जो औलाद पैदा हो अगर वह फक़ीर हो तो उसको भी देने में हर्ज नहीं क्योंकि नसब बाप से चलता है...

मां बीवी और दो बेटे में तरका की तक़्सीम कैसे❓

 मां बीवी और दो बेटे में तरका की तक़्सीम कैसे❓   * فقيــــر محمــــد امتيــــــــاز قمــــر رضـــوى امجــدى *सवाल،، ज़ैद का इंतक़ाल हो गया उसने अपने पीछे मां बीवी और दो बेटे को छोड़े तरका की तक़्सीम कैसे होगी❓* *साईल ،،मोहम्मद एजाज़ अलम (दरभंगा)* *जवाब* ،، *उन के तजहिज़ व तकफीन का खर्च पूरा करने के बाद अगर उन पर कर्ज़ हो तो उस की अदायगी की जाए, और गैरे वारिस के लिए अगर ज़ैद ने वसीयत की हो तिहाई माल से उस से नफीज़ करने के बाद मरहूम का मुकम्मल तरका अडतालीस (४८) हिस्सों में तक़्सीम होगा,* *📿 जिस में से बेवा को आठवां हिस्सा यानी (६) हिस्से मिलेंगे और छट्टा (६) हिस्सा यानी आठ (८) हिस्से वालिदा को मिलेंगे और बक़िया चौंतिस (३४) हिस्से मरहूम के दोनों बेटों में तक़्सीम होंगे, और वह इस तरह के हर एक बेटे को सतरह सतरह (१७/१७) हिस्सा मिलेंगे,* *✨ मसलन ،، वरसा में 48000 तक़्सीम करने के हैं, तो बेवा को 6000, वालिदा को 8000, और दोनों बेटों में से हर एक को 17000 / 17000 मिलेंगे* *🌷والله و رسولہ اعلم باالصواب🌷* *✍🏻 अज़ क़लम 🌹हज़रत अल्लामा व मौलाना मोहम्मद इम्तियाज़ क़मर रज़वी अमजदी साहब कि...

क्या औरत साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ सकती है ? नेज़ मर्द तहबंद पहन कर नमाज़ पढ़ सकता है कि नहीं❓

    * فقيــــر محمــــد امتيــــــــاز قمــــر رضـــوى امجــدى * *सवाल،، क्या फरमाते हैं उलमा ए दीन औरतें अक्सर वो बेश्तर साड़ी पहनती है तो क्या साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ सकती है जबकि नीचे का हिस्सा खुला रहे, मर्द हज़रात भी सिर्फ तहबंद पहन कर नमाज़ पढ़ते हैं क्या यह जायज़ है❓* *साईल،،मसउद रज़ा* *जवाब،، औरतों को साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ना तब मना है जबकि बे पर्दगी और जिस्म का हिस्सा नज़र आए वरना पर्दे के साथ साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ने में कोई क़बाहत नहीं,* *और जिन इलाक़ों में साड़ी पहनना खास गैर मुस्लिम औरतों का शआर हो की साड़ी पहनी हुई औरत को देख कर फौरन गुमान हो की यह गैर मुस्लिम है उन इलाक़ों में मुसलमान औरत को साड़ी पहनना जायज़ नहीं है की यह कुफ्फार से तशुब्ह है,* *और जिन इलाक़ों में साड़ी खास गैर मुस्लिम औरतों का शआर ना हो बल्कि मुस्लिम औरतें भी पहनती हो और गैर मुस्लिम औरतें भी तो उन इलाकों में जायज़ व दुरुस्त है, अगरचे नीचे का हिस्सा खुला हो मर्द हज़रात भी लुंगी पहन कर नमाज़ पढ़ सकते हैं पढ़ा सकते हैं हर्ज नहीं जायज़ है* *फिक़्ह ए मिल्लत हज़रत अल्लामा मुफ्ती जलालुद्दीन अहमद अमजदी...

अगर कोई मुसलमान बुत परस्ती करे तो शरीअत का क्या हुक्म है❓

  * فقيــــر محمــــد امتيــــــــاز قمــــر رضـــوى امجــدى * *सवाल*क्या फरमाते हैं मुफ्तियान ए किराम इस मसअले के बारे में की ज़ैद जो कि खुद को मुसलमान कहलाता है उसके बावजूद एलानिया तौर पर बुत परस्ती करता है, ज़ैद ने अपने खर्च पर एक मस्जिद में हाफिज़ भी रखा है जो बच्चों को इब्तिदाई दीनी किताबें पढ़ाने का काम अंजाम देते हैं, हाफिज़ साहब का खाना भी ज़ैद के घर से आता है, दरियाफ्त तलब अमर यह है कि ज़ैद के बारे में हुक्मे शरअ क्या है ? नीज़ हाफिज़ साहब का ज़ैद से उजरत लेना और उनके घर का खाना खाना कैसा है❓* *साईल, आरिफ हुसैन रज़वी बदायूं शरीफ (यूपी)* *जवाब,, सुरते मसउला में शख्स मज़कूर बुत परस्ती यानी बूतों की पूजा करने की वजह से मुर्तद है, उसका तलबा ए दजवाब-ो पढ़ाने के लिए हाफिज़ साहब को तनख्वाह देना और खाना खिलाना नफा बख्श नहीं, क्योंकि इस्लाम व कुफ्र में वास्ता नहीं, एक शख्स या तो मुसलमान होगा या काफिर,* *अल्लाह एक है उसका कोई शरीक नहीं कुरान शरीफ में है लाशरीका लहू (لا شریک لہ)* (सुरह दहर इनआम:१६३) *💫 इबादत सिर्फ उसी की है, बूतों को पूजना नस्से क़तई के खिलाफ है, सुर ए फातिहा में है...